एक इंसान जितना विनम्र हो सकता है उतना हूँ, शायद विरासत मे मिला है ये गुण...लोगों से बेहद प्यार करता हूँ, उनसे एक कुछ ज़्यादा बे ज़ुबानो से, जब लोग आपके पद से आपका कद, आँकते हैं वहाँ में सिर्फ़ आपकी शराफ़त और मासूमियत पर जान देने का जज़्बा रखता हूँ, मेरे आदर्श मेरे पिता कहते थे, बेहतर इंसान बनो....बस उसी कोशिश मे लगा हूँ ...इतना मुश्किल भी नही है...बाकी भगत सिंह की कही बात पर अमल करता हूँ,
जिंदगी अपने दम पर जी जाती है,
दूसरों के कंधों पर तो जनाज़े उठा करते हैं..