अपने बारे में कहना हमेशा बेहद मुश्किल होता है...शायद माता-पिता के लाड़ प्यार ने थोड़ा बिगाड़ दिया है....गुस्सा दूसरों से तेज आता है और प्यार सबसे करता हूँ...सच बोलना सबसे अच्छा लगता है....आज भी लोग इसीलिए पसंद करते हैं....
किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं...डॉ जाकिर हुसैन की कही बात बेहद सही लगती है....पता नही क्यों मेरे सारे सवालों के जवाब किताबों में ही मिल जाते हैं...क्या सवाल इतने आसान हैं मेरे...बेहद आम आदमी हूँ...जीवन का मकसद इतना ही...शीर्ष पर कब्जा करने की जिद, कुछ जिंदा संवेदनाओं के साथ....अगर अनाथालय नही खोलना होता तोः रोबिन शर्मा की तरह हिमालय निकल गया होता आध्यात्मिक शांति की तलाश में...
मीडिया में कमर वाहिद नकवी, मधुकर उपाध्याय निशिकांत ठाकुर और प्रणव राय जैसे लोग विनम्र बने रहने की प्रेरणा देते रहते हैं....